इस 18 हाथों वाली तंत्र-मंत्र की देवी के दर्शन करते ही पलट जाएगी आपकी किस्मत,जाने कहा है इनका मंदिर।

चैत्र नवरात्रि शुरू हो चुकी है जिसमें देवी मां के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। देवी भागवत पुराण में माता के शक्तिपीठों की संख्या 108 बताई गई है और दुर्गा सप्तशती और तंत्र चूड़ामणि में यह संख्या 52 बताई गई है। इन्हीं शक्तिपीठों में से एक है बांसवाड़ा का त्रिपुर सुंदरी मंदिर। नवरात्रि के दिनों में इस मंदिर में देश भर से तांत्रिक पूजा करने आते हैं। तांत्रिक अपनी सिद्धि को पूर्ण करने के लिए देवी मां की ही आराधना करते हैं। इस चमत्कारी मंदिर में वर्षों से तंत्र-मंत्र की तमाम पूजाएं होती आ रही हैं। इस मंदिर को राजयोग देने वाला मंदिर भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित और अटल बिहारी वाजपेयी तक कई राजनेता राजयोग प्रदान करने वाली मां के मंदिर में दर्शन करने आ चुके हैं। आइए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों कहा जाता है.

राजस्थान के बांसवाड़ा के उमराई गांव में त्रिपुर सुंदरी का यह मंदिर तंत्र-मंत्र की पूजा के लिए जाना जाता है। स्थानीय लोग इस मंदिर को तुरतई माता मंदिर के नाम से भी जानते हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जो भी यहां माता से मन्नत मांगता है उसकी मनोकामना तुरंत पूरी हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि मुस्लिम आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने भी इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था लेकिन लोगों ने पहले ही मंदिर से माता की मूर्ति निकाल ली थी। मुख्य मंदिर के दरवाजे चांदी से बने हैं और यहां मां त्रिपुर सुंदरी की मूर्ति रौद्र मुद्रा में है।

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मां भगवती त्रिपुर सुंदरी की मूर्ति अष्टादश अर्थात अठारह भुजाओं वाली है। मूर्ति में देवी दुर्गा के 9 रूपों की प्रतिकृतियां उकेरी गई हैं। इस मंदिर में हर दिन तीन बार मां का रूप बदला जाता है और सप्ताह के सातों दिन मां को तीन रूपों में सजाया जाता है। माँ सुबह कुंवारी, दोपहर को जवान और शाम को प्रौढ़ नजर आती है। यानि कि जब आप इस मंदिर में देवी मां के दर्शन के लिए जाएंगे तो आपको उनके अलग-अलग रूप दिखाई देंगे।

इस मंदिर को राजयोग देने वाला मंदिर कहा जाता है। नवरात्र में देवी मां के दर्शन के लिए बांसवाड़ा पहुंचे ज्योतिषाचार्य मृगेंद्र चौधरी का कहना है कि इस मंदिर में देश के बड़े-बड़े राजनेता माथा टेकने आते हैं, क्योंकि मान्यता है कि मां त्रिपुर सुंदरी के आशीर्वाद से सत्ता का सुख मिलता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, हरिदेव जोशी, अमित शाह, अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे समेत कई राजनेता राजस्थान के इस मंदिर में मत्था टेक चुके हैं.

ज्योतिषाचार्य मृगेंद्र चौधरी बताते हैं कि जब भगवान शिव माता सती के मृत शरीर को लेकर ब्रह्मांड में घूम रहे थे, तब भगवान विष्णु ने भगवान शिव का मोहभंग करने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता के शरीर को विच्छेदित कर दिया था। तब इस स्थान पर माता सती का मस्तिष्क गिरा था। जहां यह मंदिर बना हुआ है. तांत्रिकों के बीच इस पीठ की काफी लोकप्रियता है। असम के कामाख्या और कोलकाता के दक्षिण काली मंदिर की तरह इस मंदिर में भी तंत्र पूजा की जाती है। इस मंदिर में जहां तांत्रिक तंत्र-मंत्र साधना के लिए आते हैं, वहीं दूसरी ओर आम लोग संतान प्राप्ति और पारिवारिक सुख के लिए देवी मां के दर्शन करने आते हैं।

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